हरछठ व्रत भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है इस व्रत में हरछठ माता की उपासना की जाती है इस दिन महिलाएं अपने पुत्र और अपनी संतानों के लिए लंबी उम्र की कामना करती हैं और गेहूं और चने की बालियों की उपासना करती है
हरछठ व्रत से लाभ
संतान की लंबी उम्र एव स्वास्थ्य समस्याओं का निदान
इस व्रत को करने से संतान को सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं और संतान दीर्घायु होती है मानता यह है कि इस व्रत को करने से जो भी आपकी संतान के ऊपर बाधाएं ,रोग या अन्य प्रकार की कोई भी समस्या उत्पन्न होने वाली होगी वह समाप्त हो जाएगी
संतान प्राप्ति
जिन दंपतियों के संतान नहीं है वह इस व्रत को अवश्य करें और माता से प्रार्थना करें ।
ऐसी मान्यता है कि यदि आप सच्चे मन से इस व्रत को करते हैं और सच्चे मन से माता की उपासना करते हैं तो निश्चित ही संतान सुख की प्राप्ति होती है
घर मे सुख – शान्ति और समृद्धि
इस व्रत को करने से घर में सुख शांति और समृद्धि आती है घर की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है एवं नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है तथा जिस घर में शुभ कार्य नहीं हो रहे होते हैं वहाँ मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं
हरछठ व्रत कथा
एक समय की बात है एक ब्राह्मण लगभग दंपति रहते थे । उन ब्राह्मण दंपतियों को संतान का सुख नहीं था । जिस कारण वह अत्यंत ही दुखी और निराश रहते थे फिर एक दिन एक दिव्या महिला का उनके घर में आगमन हुआ उन्होंने उसे दिव्या महिला का अत्यंत स्वागत एवं सत्कार किया जब वह अत्यंत प्रसन्न हुई तो उन्होंने बोला की तुम इतने दुःखी क्यों हो तब ब्राह्मण दंपति उनके सामने भाव विभोर होकर कहने लगा की माता मुझे कोई संतान नहीं है तब उस महिला के द्वारा उन्हें हरछठ व्रत के विषय में बताया गया और किस प्रकार करना है इसके विषय में पूर्ण जानकारी दी गई उस महिला ने कहा की सच्चे मन से , मन में संतान प्राप्ति की इच्छा लेते हुए इस व्रत को करें । आपको संतान सुख अवश्य होगा उसके बाद उन ब्राह्मण दंपति ने व्रत रखा और माता के आशीर्वाद से उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हुई । इसी प्रकार जो भी दंपति इस व्रत को करता है उसकी संतान सुख की प्राप्ति होती है और माता का सदैव आशीर्वाद उसे व्यक्ति के ऊपर बना रहता है ।



