
एक समय की बात है, एक सुनहरी नगरी में एक बहुत खूबसूरत और धर्मपरायण रानी थी, जिसका नाम था वत्सला। वह अपने पति राजाजी से बहुत प्यार करती थी। एक बार, वत्सला ने अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। इस दिन, वह सूर्योदय से पहले स्नान करके सारा दिन उपवासी रही।
पूरे दिन का कठिन उपवास करते हुए, वत्सला ने अपनी पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं, रानी की सहेलियों ने उससे कहा कि, “अगर तुम्हारा पति तुम्हें भूल जाए तो तुम उसके प्यार को खो दोगी।” इस बात से चिंतित होकर वत्सला ने सोचा कि उसे अपने पति की सुरक्षा करनी चाहिए।
रात में जब चंद्रमा निकला, तब वत्सला ने चाँद को देखकर क्षणिक ध्यान किया और फिर अपने पति को बुलाया। लेकिन अचानक कुछ अप्रत्याशित घटित हुआ। रानी का पति गहरी नींद में चला गया और उसकी जान जोखिम में आ गई।
वत्सला ने अपने पति का नाम लेते हुए चाँद को देखकर जल अर्पित किया और प्रार्थना की कि वह अपने पति की रक्षा करे। ईश्वर ने उसकी प्रार्थना सुन ली और राजाजी को बुरी शक्तियों से बचाया।
राजाजी ने जब आंखें खोलीं, तो उन्होंने अपनी पत्नी को देखा और उनकी लंबी उम्र के लिए करवा चौथ व्रत की महिमा को समझा। इस प्रकार रानी वत्सला की भक्ति और प्रेम ने उन्हें फिर से एक साथ जोड़ा।
यह कहानी यह संदेश देती है कि सच्चे प्रेम और भक्ति से सब कुछ संभव है। करवा चौथ पर महिलाएं इस कथा के माध्यम से अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास रखती हैं और अपने प्रेम को नवीनीकरण करती हैं।


