गुरु चांडाल योग बृहस्पति और राहु ग्रह की युति या दृष्टि से बनता है जिसमें बृहस्पति को गुरु और राहु को चांडाल माना जाता है यह अत्यंत ही अशुभ योग है क्योंकि इस योग के कारण जातक का चरित्र प्रभावित होता है अनैतिक कार्यों की तरफ झुकाव रखता है व्यक्ति को आर्थिक सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है इस योग से बचने के लिए राहु से संबंधित उपाय करे जाते हैं तथा राहु का जाप किया जाता है।
गुरु चांडाल योग है क्या
यह योग तब बनता है जब किसी कुंडली में बृहस्पति और राहु एक साथ बैठते हैं यह एक दूसरे पर दृष्टि डालते हैं इसमें बृहस्पति ज्ञान और धर्म – राहु अनैतिकता और भ्रम का ग्रह माना जाता है जिस कारण इस प्रकार के योग का निर्माण होता है ।
गुरु चांडाल योग में भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए तथा गुरु को प्रसन्न करना चाहिए इसे राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं



