नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है।
माँ के मस्तक पर अर्धचंद्र के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
सिंह पर सवार माँ का यह रूप शांति, साहस और वीरता का प्रतीक है।
माँ चंद्रघंटा की कृपा से जीवन में सुख-शांति और अपार शक्ति का संचार होता है।
इनके ध्यान से सभी प्रकार के भय और विघ्न दूर होते हैं।
माँ की साधना साधक को दिव्य आभा और अद्भुत तेज प्रदान करती है।
आइए, माँ चंद्रघंटा से प्रार्थना करें –
“हे माँ! हमारे जीवन से भय, दुख और संकट दूर कर हमें धर्म, साहस और सत्य के मार्ग पर अग्रसर करें।”
बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ चंद्रघंटायै नमः॥
ध्यान मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥



